Tuesday, 3 March 2009

अराजक सृजन : एक अजीब मिश्रण

ब्लॉग्गिंग की दुनिया मेरे लिए बिलकुल भी नयी नही है। पिछले तीन सालों से मैं लिखता आ रहा हूँ - ज्यादातर अंग्रेजी में लेकिन अभिव्यक्ति जब भाषा में बंध जाती है तो अपाहिज हो जाती है। हिन्दी से मेरा प्रेम है, छुटपन में मैंने तोतली जुबान में इसी भाषा का उपयोग किया था इसलिए हिन्दी मेरे अन्दर कहीं गहरे तक जाती है। इसलिए सोचा क्यो ना हिन्दी में भी ब्लॉग लिखा जाए।

मेरा पूरा प्रयास रहेगा की कैसे मैंने पढने वालों को भाषा से अभाषा तक ले जा सकूं और एक अराजक सृजन कर सकूं क्योंकि ये मेरा विश्वास नही बल्कि मेरा अनुभव है की हर सृजन अराजकता से ही पैदा होता है।

सधन्यवाद।

6 comments:

.... said...

Its really awesome that you are blogging in Hindi!!! At the risk of sounding parochial, I really think we need to write, read and think, in local languages, whatever they are Hindi,Marathi, telugu... certain experiences and expressions just cannot be translated in English. And its so important that they be preserved, and nourished... lest they drown in homogenizing wave of English led modernity... great post... keep up the good work.

Sanjeet Tripathi said...

वाह , यह हुई न कोई बात।
बहुत बढ़िया जो आपने हिंदी में लिखना शुरु किया।

वैसे भी केदारनाथ सिंह जी ने लिखा ही है कि "जैसे चींटियाँ लौटती हैं बिलों में / कठफोड़वा लौटता है काठ के पास / ओ मेरी भाषा! मैं लौटता हूँ तुम में
जब चुप रहते-रहते अकड़ जाती है मेरी जीभ / दुखने लगती है मेरी आत्मा"

इसके बाद तो कुछ कहने को रह ही नहीं जाता बंधुवर।
शुभकामनाएं

anupam mishra said...

अंग्रेज चले गए लेकिन एक ऐसी भाषा छोड़ गए । जो हमारे कोर्स तक में अपना विशिष्ट स्थान रखती है। खैर यदि ये हिंदी पर आपकी वापसी है तो स्वागत है भारत मां के समस्त लालों का...और हिंदी का सम्मान करने वालों का...

sonia shrivastava said...
This comment has been removed by the author.
sonia shrivastava said...

its a pleasure reading your hindi blog as well as english....keep writing , looking forward to read some great stuff by you..as your words are always amazing..

madhu said...

Hindi is more difficult then English.thats why Indians prefer to use english and not Hindi